समस्त दुःखों के निवारण के लिए यज्ञ

सनातन धर्म में यज्ञ की परंपरा वैदिक काल से चली आ रही है, धर्म ग्रंथों में विभिन्न कार्यो एवं उद्देश्यों के लिये विभिन्न यज्ञों का उल्लेख है।

समस्त दुःखों के निवारण के लिये यहाँ विभिन्न यज्ञों का उल्लेख किया गया है, ये समस्त यज्ञ “समस्त दुःखों के निवारण” के लिये किये जाते हैं। परन्तु इन सभी यज्ञों की शक्ति अलग-अलग होती है (किसी की कम व किसी की ज्यादा) और इनकी शक्तियों के अनुसार ही भक्त को फल मिलता है और उसके दुःखों का निवारण होता है।

जो व्यक्ति अपने समस्त दुःखों के निवारण के लिये जितना शक्तिशाली यज्ञ करता/करवाता है उसके दुःखों के निवारण होने की सुनिश्चितता भी शीघ्र-अतिशीघ्र उतनी ही प्रबल होती है।

शक्ति के अनुसार घटते हुए क्रम में यज्ञ निम्नलिखित हैं :

  1. अति रुद्र महा यज्ञ

  2. महा रुद्र यज्ञ

  3. रुद्र अभिषेक

  4. लघु रुद्र यज्ञ

  5. शिव यज्ञ/रुद्र यज्ञ

अति रुद्र महा यज्ञ

अति रुद्र महा यज्ञ

महा रूद्र यज्ञ

महा रूद्र यज्ञ

रुद्र अभिषेक

रुद्र अभिषेक

लगु रुद्र यज्ञ

लगु रुद्र यज्ञ

शिव यज्ञ/रुद्र यज्ञ

शिव यज्ञ/रुद्र यज्ञ

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