यज्ञ

वैदिक सनातन धर्म में यज्ञ की बड़ी महिमा है। स्वयं वेद भी यज्ञ से ही उत्पन्न हुए हैं। सनातन धर्म (हिन्दू धर्म) में विभिन्न कार्यो /प्रावधानों के लिये विभिन्न यज्ञों का प्रचलन है। जो कि सभी यज्ञों का अपना महत्व है, एंव सभी यज्ञ जो जिस कार्य के लिये होता है उसके पूरा होने का फल देता है।

यज्ञ की पहचान अग्नि हैं। अग्नि यज्ञ का अहम हिस्सा हैं। जो कि प्रतीक है शक्ति का, ऊर्जा का, सदा ऊपर उठने का, इसी अग्नि में ताप भी छिपा है तो भाप भी छिपी हैं। यहीं अग्नि जलाती भी है तो प्रकाश भी देती हैं। इसी अग्नि से जल भी बनता है जो मानव जीवन के लिए नहीं अपितु पूरी प्रकृति के लिए वरदान मय अमृत हैं। इस तरह से जहाँ अग्नि देवता के रूप में पूजनीय हैं। वहीं यज्ञ भी एक तरह की पूजा हैं।

मनोकामना यज्ञ

मनोकामना यज्ञ

ग्रहस्थ सुख यज्ञ

ग्रहस्थ सुख यज्ञ

धन प्राप्ति यज्ञ

धन प्राप्ति यज्ञ

नवग्रह शांति यज्ञ

नवग्रह शांति यज्ञ

देव यज्ञ

देव यज्ञ

पितृ यज्ञ

पितृ यज्ञ

समस्त दुःखों के निवारण के लिए यज्ञ

समस्त दुःखों के निवारण के लिए यज्ञ

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