मनोकामना यज्ञ
हिंदू धर्म में यज्ञ की परंपरा वैदिक काल से चली आ रही है। धर्म ग्रंथों में मनोकामना पूर्ति व किसी बुरी घटना को टालने के लिए यज्ञ करने के कई प्रसंग मिलते हैं। रामायण व महाभारत में ऐसे अनेक राजाओं का वर्णन मिलता है, जिन्होंने महान यज्ञ किए हैं। देवताओं को प्रसन्न करने के लिए भी यज्ञ किए जाने की परंपरा है।
मनोकामनाओं को पूर्ण करने के लिये यहाँ विभिन्न यज्ञों का उल्लेख किया गया है, ये समस्त यज्ञ मनोकामनाएं पूर्ण करने के लिये किये जाते हैं। परन्तु इन सभी यज्ञों की शक्ति अलग-अलग होती है (किसी की कम व किसी की ज्यादा) और इनकी शक्तियों के अनुसार ही भक्त को फल मिलता है और उसकी मनोकामना पूर्ण होने की सुनिश्चितता एवं समय भी उसी पर निर्भर करता है।
जो व्यक्ति अपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिये जितना शक्तिशाली यज्ञ करता/करवाता है उसकी मनोकामना पूर्ण होने की सुनिश्चितता भी शीघ्र-अतिशीघ्र उतनी ही प्रबल होती है।
शक्ति के अनुसार घटते हुए क्रम में यज्ञ निम्नलिखित हैं :
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कोटि चंडी यज्ञ
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लक्ष्य चंडी यज्ञ
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सहस्त्र चंडी यज्ञ
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शत चंडी यज्ञ
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नव चंडी यज्ञ
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चंडी यज्ञ








