पितृदोष पूजा
पितृदोष पूजा
सभी के जीवन पर पितरों का गहरा प्रभाव पड़ता है, कहा जाता है की पितृ जिनसे नाराजा हो जाते है वे लोग अनेक समस्याओं में घिर जाते है, जैसे, स्वयं का घर न बनना, संतान सुख से वंचित, नौकरी, विवाह, पितृदोष आदि।
अगर किसी व्यक्ति की कुंडली मे पितृ दोष है तो ऐसे व्यक्ति को हर क्षेत्र में असफलता ही मिलती है।
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श्राद्ध पक्ष की तिथियों में लोग अपने अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण करते है, तर्पण का अर्थ होता है की हम अपने पितरों को भूले नहीं है और वे हमारे लिए सदैव पूजनीय है, अगर किसी व्यक्ति की कुंडली मे पितृ दोष है तो ऐसे व्यक्ति को हर क्षेत्र में असफलता ही मिलती है, और ऐसे लोगों को जीवन में अनेक कष्ट भोगने पड़ते है, ख़ास कर संतान से सम्बंधित दिक्कते और धन से सम्बंधित दिक्कते भी बनी रहती है।
ऐसी मान्यता है कि जो लोग पितृ पक्ष में पूर्वजों का तर्पण नहीं कराते, उन्हें पितृदोष लगता है इससे मुक्ति पाने का सबसे आसान उपाय पितरों का श्राद्ध कराना है और इसी के साथ अगर आप अपने घर में पितृ दोष निवारण पूजा कराते है तो पितृ दोष से श्रापित जीवन से जल्दी ही मुक्ति मिलती है।
यह पूजा महीने में आनेवाली प्रत्येक अमावस्या को करने से भी पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।
यह सेवा सिर्फ “धर्मनगरी-हरिद्वार” में उपलब्ध है।
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मोक्षप्रदा पतित-पावनी माँ श्री गंगा जी की धरती व देवभूमि के द्वार हरिद्वार की पावन धरा पर हम आपको पूजा-पाठ, दान-पुण्य एवं तीर्थयात्रा करने की समस्त सुविधाएं व सेवाएँ उपलब्ध कराते हैं।
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धर्मनगरी हरिद्वार में किये गये पूजा-पाठ, दान-पुण्य का सर्वाधिक और अलौकिक लाभ व्यक्ति को मिलता है।
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पुराणों और शास्त्रों के अनुसार धर्मनगरी हरिद्वार को ही पूजा-पाठ, दान-पुण्य करने के लिए सबसे सर्वश्रेष्ठ, महत्वपूर्ण, उत्तम एवं उपयुक्त तीर्थ-स्थान माना गया है, एवं चारधाम तीर्थयात्रा तो होती ही शुरू “धर्मनगरी हरिद्वार” से है।
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पुराणों व शास्त्रों में कहा गया है कि व्यक्ति को अपने जीवन में कम से कम एक बार हरिद्वार जा के गंगा स्नान कर पूजा-पाठ व दान पुण्य करना चाहिये, क्योंकि इससे व्यक्ति के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। हरिद्वार को “मोक्ष का द्वार” भी कहा जाता है।
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धर्मनगरी हरिद्वार भगवान शिव जी, भगवान विष्णु जी और माँ श्री गंगा जी की भूमि है, इसलिये इसको“देवताओं का प्रवेश द्वार” कहते हैं।
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हरिद्वार को “धर्मनगरी”,”माँ श्री गंगा जी की धरती”,”कुम्भ-नगरी”,”देवनगरी”, “मोक्ष का द्वार”, “देवताओं का प्रवेश द्वार” , “हरि का द्वार”, आदि नामों से भी जाना जाता है। भगवान शंकर जी की ससुराल “कनखल” भी हरिद्वार में ही है।इसलिये हरिद्वार को विश्व की “आध्यात्मिक राजधानी” कहा जाता है।
यह वेबसाइट www.snatandharmkarm.com धार्मिक ट्रस्ट “उमा महेश्वर सेवा ट्रस्ट” द्वारा संचालित है।
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इस पितृ दोष निवारण पूजा के प्रभाव से जीवन की सारी बाधाएं और मुश्किलें दूर होती हैं।
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गृहस्थ जीवन और कामकाज में आ रही सभी समस्याओ से निजात मिलती है और घर में धन-धान्य और सुख- समृद्धि की प्राप्ति होती है।
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संतानहीन जातकों को पितृ दोष निवारण पूजा करने से संतान की प्राप्ति होती है।
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पितृदोष के बुरे प्रभाव से मुक्ति मिलती है।
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यह पूजा करने से जातक के मन में अध्यात्म के प्रति रूचि बढ़ती है और उसे आत्मिक शांति की प्राप्ति होती है।
पितृदोष पूजा प्रक्रिया विवरण :-
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पूजा के लिये दिनों की कुल संख्या : 7 no.
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पूजा के लिये पंडितों की कुल संख्या : 1 no.
चैरिटी : Rs. 19,500/Couple/Head
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पूजा के लिये समस्त पूजन सामग्री : Rs. 1100 (प्रथम दिन) + 500/दिन
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पूजा के लिये प्रत्येक पंडित को दक्षिणा : Rs. 1100/दिन
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पूजा के लिये एक दिन का यज्ञशाला के लिये दान : Rs. 1100/दिन (Optional)






