गौ (गाय) दान

यदि आप गाय का दान करते हैं तो इससे बड़ा कोई दूसरा पुण्य कार्य नहीं। अधिकांश लोग अपने परिजनों की मृत्यु के बाद उनके नाम से गाय का दान करते हैं।

इसके पीछे मान्यता यह है कि मृतात्मा जब स्वर्ग या नर्क की यात्रा कर रही होती है तो उसके रास्ते में पड़ने वाली वैतरणी नदी को गाय की पूंछ पकड़कर ही पार करना होता है। जो गौदान करता है उस मृतात्मा को वही गाय वैतरणी पार करवाती है।
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Price : Rs 3,300

हिंदू धर्म में कई तरह के दानों की बात की जाती है। मगर, इन सबमें गौ दान सबसे विशिष्ट है। कहा जाता है कि गाय में सभी देवताओं का वास होता है और इसलिए गाय का दान करने से सभी तरह के कल्याण होते हैं। इसलिए गोदान से पूर्व गाय का श्रृंगार करना चाहिए। गाय के वस्त्र, श्रृंगार का सामान, आभूषण व अन्य सामग्रियों से गाय की पूजा करनी चाहिए।

मान्यता है कि गाय के सींगों में ब्रह्मा और विष्णु का निवास है। गाय के सिर में महादेव, माथे पर गौरी और नथनों में कार्तिकेय का वास है। आंखों में सूर्य-चंद्रमा, नाक में कम्बल और अश्वतर नाग, कानों में अश्विनी कुमार, दांतों में वासुदेव, जीभ में वरुण और गले में देवराज इंद्र, बालों में सूर्य की किरणें, खुर में गंधर्व, पेट में पृथ्वी और चारों थनों में चारों समुद्र रहते हैं। गोमुत्र में गंगा और गोबर में यमुना का निवास माना है।

 

क्यों करना चाहिए गौ दान

शास्त्रों के अनुसार, जो लोग श्रेष्ठ मृत्यु चाहते हैं, अलंकृत विमान के जरिए अपने परमात्मा के पास पहुंचना चाहते हैं, उन्हें गोदान जरूर करना चाहिए। इसके अलावा गोदान करने से पितृ मोक्ष भी होता है। इसलिए हिंदू धर्म में सभी मनुष्यों को जीवन में एक बार यह दान जरूर करना चाहिए।

 

कैसी होनी चाहिए गाय

हमेशा ऐसी गाय का दान करना चाहिए, जो वृद्ध नहीं हो। उसके सींग और खुर चमकदार हों। गाय के साथ सोने या कांस्य के बर्तन में घी-दूध और तिल डालकर कुश के साथ उस गाय की पूंछ पर रखकर उसे दान किया जाना चाहिए। दान की पूर्णता के लिए गाय के साथ ही यथा-शक्ति धन या सोने का भी दान करना चाहिए।

 


यह सेवा सिर्फ “धर्मनगरी-हरिद्वार” में उपलब्ध है।

  • मोक्षप्रदा पतित-पावनी माँ श्री गंगा जी की धरती व देवभूमि के द्वार हरिद्वार की पावन धरा पर हम आपको पूजा-पाठ, दान-पुण्य एवं तीर्थयात्रा करने की समस्त सुविधाएं व सेवाएँ उपलब्ध कराते हैं।

  • धर्मनगरी हरिद्वार में किये गये पूजा-पाठ, दान-पुण्य का सर्वाधिक और अलौकिक लाभ व्यक्ति को मिलता है।

  •   पुराणों और शास्त्रों के अनुसार धर्मनगरी हरिद्वार को ही पूजा-पाठ, दान-पुण्य करने के लिए सबसे सर्वश्रेष्ठ, महत्वपूर्ण, उत्तम एवं उपयुक्त तीर्थ-स्थान माना गया है, एवं चारधाम तीर्थयात्रा तो होती ही शुरू “धर्मनगरी हरिद्वार” से है।

  • पुराणों व शास्त्रों में कहा गया है कि व्यक्ति को अपने जीवन में कम से कम एक बार हरिद्वार जा के गंगा स्नान कर पूजा-पाठ व दान पुण्य करना चाहिये, क्योंकि इससे व्यक्ति के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। हरिद्वार को “मोक्ष का द्वार” भी कहा जाता है।

  • धर्मनगरी हरिद्वार भगवान शिव जी, भगवान विष्णु जी और माँ श्री गंगा जी की भूमि है, इसलिये इसको“देवताओं का प्रवेश द्वार” कहते हैं।

  • हरिद्वार को “धर्मनगरी”,”माँ श्री गंगा जी की धरती”,”कुम्भ-नगरी”,”देवनगरी”, “मोक्ष का द्वार”, “देवताओं का प्रवेश द्वार” , “हरि का द्वार”, आदि नामों से भी जाना जाता है। भगवान शंकर जी की  ससुराल “कनखल” भी हरिद्वार में ही है।इसलिये हरिद्वार को विश्व की “आध्यात्मिक राजधानी” कहा जाता है।

 

यह वेबसाइट www.snatandharmkarm.com धार्मिक ट्रस्ट  “उमा महेश्वर सेवा ट्रस्ट”  द्वारा संचालित है।

  • यह मृत्यु के बाद मोक्ष प्राप्त करने में मदद करता है।

  • गौ दान व्यक्ति को शुद्ध बनाने में मदद करता है और उसे अनंत आनंद की उच्चतम स्थिति प्राप्त करने के लिए प्रेरित करता है। ऐसा कहा जाता है कि अनाज, पानी, कपड़े इत्यादि का दान करना या दुश्मनों को दोस्तों में बदलने के लिए एक जरूरतमंद व्यक्ति को उपहार के रूप में एक गाय भेंट करना। यह दान मृत्यु के बाद भी एक शांतिपूर्ण जीवन प्रदान करता है।

  • गाय का दान करने पर सूर्यलोक की प्राप्ति होती है।

  • गौ दान हमारे पाप कर्मों या पापों से छुटकारा पाने में मदद करता है।

  • यह हमारे ऋणों को साफ करने में भी मदद करता है और माफी भी प्राप्त करता है।

  • पाप धेनु दान: पापों से छुटकारा पाने के लिए।

  • करज मुक्ति धेनु दान: ऋणों से मुक्ति के लिए।

  • मोक्ष धेनु दान: मोक्ष के लिए (आत्मज्ञान)।

  • प्रयास्तचित धेनु दान: क्षमा मांगने के लिए।

  • वैतरणी धेनु दान: मोक्ष (आत्मज्ञान) के लिए व्यक्ति के जीवन के अंतिम दिनों में गाय दान।

  • यह व्यक्ति को शुद्ध बनाने में मदद करता है और उसे अनन्त आनंद की उच्चतम स्थिति प्राप्त करने में मदद करता है।

  • ऐसा कहा जाता है कि सूर्य, चंद्रमा, वरुण, अग्नि, ब्रह्मा, विष्णु, शिव उस व्यक्ति को प्रणाम करते हैं जो गाय का दान करता है।

गौ (गाय) दान-पूजा प्रक्रिया विवरण :-

  •  पूजा के लिये दिनों की कुल संख्या : 1 no.

  •  पूजा के लिये पंडितों की कुल संख्या : 1 no.

चैरिटी  :  Rs. 3,300 + दान की वस्तु का मूल्य/Couple/Head

  •  पूजा के लिये समस्त पूजन सामग्री : Rs. 1100

  •  दान-पूजा के लिये गाय का मूल्य : आप पर निर्भर है।

  • पूजा के लिये प्रत्येक पंडित को दक्षिणा : Rs. 1100

  •  पूजा के लिये एक दिन का यज्ञशाला के लिये दान : Rs. 1100 (Optional)

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