उमा महेश्वर सेवा ट्रस्ट, सनातन धर्म, और अखाड़ों के संपर्क में रहें
प्रत्यक्ष रूप :-
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ट्रस्ट में ट्रस्टी बन के वैचारिक, आर्थिक एंव संचालिक तरीके से।
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ट्रस्ट में दान कर के।
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ट्रस्ट का प्रचार-प्रसार करके, ज्यादा से ज्यादा संख्या में लोगों को इससे जोड़ कर, जिससे वो धर्म-कर्म में रुचि लें, और फिर धर्म-कर्म के कार्यो में जुट जायें।
अप्रत्यक्ष रूप :-
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ट्रस्ट के उत्पादों की खरीदारी करके।
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ट्रस्ट की सेवाओं को इस्तेमाल करके।
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जो भी धन आप ट्रस्ट कि सेवाओं और उत्पादों पर खर्च करेंगें, उनका इस्तेमाल ट्रस्ट के उद्येश्यों को पूरा करने के लिए होगा।



