आषाढ़ शुक्ल पक्ष पूजा

आषाढ़ महीने के शुक्लपक्ष की शुरुआात गुप्त नवरात्रि से होती है।

Price : Rs 24,900

आषाढ़ महीने के शुक्लपक्ष की शुरुआात गुप्त नवरात्रि से होती है। आषाढ़ महीने का शुक्लपक्ष भौगोलिक, धार्मिक और सेहत के नजरिये से बहुत ही महत्वपूर्ण है। इन दिनों सूर्य आर्द्रा नक्षत्र में आ जाता है। इसलिए गर्मी का मौसम अपने आखिरी चरण में रहता है। इसके बाद से दिन छोटे और रातें लंबी होने लगती हैं।

फिर श्रावण महीना शुरू होता है। जो कि बारिश के मौसम की शुरुआत माना जाता है। इस तरह आषाढ़ महीने का शुक्लपक्ष मौसमी बदलाव वाला समय होता है। इसलिए हिंदू धर्म में सेहत का ध्यान रखते हुए आषाढ़ महीने के शुक्लपक्ष के तीज-त्योहारों की परंपरा है।

आषाढ़ शुक्लपक्ष में भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा, भड़ली नवमी, देवशयनी एकादशी और गुरु पूर्णिमा जैसे बड़े व्रत और पर्व मनाए जाते हैं। इसलिए पद्म, स्कंद और विष्णु पुराण सहित अन्य ग्रंथों में आषाढ़ महीने के शुक्लपक्ष को बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण माना गया है।

 


यह सेवा सिर्फ “धर्मनगरी-हरिद्वार” में उपलब्ध है।

  • मोक्षप्रदा पतित-पावनी माँ श्री गंगा जी की धरती व देवभूमि के द्वार हरिद्वार की पावन धरा पर हम आपको पूजा-पाठ, दान-पुण्य एवं तीर्थयात्रा करने की समस्त सुविधाएं व सेवाएँ उपलब्ध कराते हैं।

  • धर्मनगरी हरिद्वार में किये गये पूजा-पाठ, दान-पुण्य का सर्वाधिक और अलौकिक लाभ व्यक्ति को मिलता है।

  •   पुराणों और शास्त्रों के अनुसार धर्मनगरी हरिद्वार को ही पूजा-पाठ, दान-पुण्य करने के लिए सबसे सर्वश्रेष्ठ, महत्वपूर्ण, उत्तम एवं उपयुक्त तीर्थ-स्थान माना गया है, एवं चारधाम तीर्थयात्रा तो होती ही शुरू “धर्मनगरी हरिद्वार” से है।

  • पुराणों व शास्त्रों में कहा गया है कि व्यक्ति को अपने जीवन में कम से कम एक बार हरिद्वार जा के गंगा स्नान कर पूजा-पाठ व दान पुण्य करना चाहिये, क्योंकि इससे व्यक्ति के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। हरिद्वार को “मोक्ष का द्वार” भी कहा जाता है।

  • धर्मनगरी हरिद्वार भगवान शिव जी, भगवान विष्णु जी और माँ श्री गंगा जी की भूमि है, इसलिये इसको“देवताओं का प्रवेश द्वार” कहते हैं।

  • हरिद्वार को “धर्मनगरी”,”माँ श्री गंगा जी की धरती”,”कुम्भ-नगरी”,”देवनगरी”, “मोक्ष का द्वार”, “देवताओं का प्रवेश द्वार” , “हरि का द्वार”, आदि नामों से भी जाना जाता है। भगवान शंकर जी की  ससुराल “कनखल” भी हरिद्वार में ही है।इसलिये हरिद्वार को विश्व की “आध्यात्मिक राजधानी” कहा जाता है।

 

यह वेबसाइट www.snatandharmkarm.com धार्मिक ट्रस्ट  “उमा महेश्वर सेवा ट्रस्ट”  द्वारा संचालित है।

  •  इस पूजा माह में, कोई भी नये कार्य करने का अलौकिक महत्व है।

  •  इस माह में पूजा-अर्चना के साथ किये गये कार्य अत्याधिक सफल होते हैं, और अलौकिक फलदायक भी होते हैं।

आषाढ़ शुक्ल पक्ष पूजा प्रक्रिया विवरण :-

  •  पूजा के लिये दिनों की कुल संख्या : 9 no.

  •  पूजा के लिये पंडितों की कुल संख्या : 9 no.

चैरिटी  :  Rs. 24,900/Couple/Head

  •  पूजा के लिये समस्त पूजन सामग्री : Rs. 1100 (प्रथम दिन) + 500/दिन

  •  पूजा के लिये प्रत्येक पंडित को दक्षिणा : Rs. 1100/पंडित/दिन

  •  पूजा के लिये एक दिन का यज्ञशाला के लिये दान : Rs. 1100/दिन (Optional)

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